तुम तसव्वुर करो और बढ़ते रहो,
तुम तसव्वुर करो और बढ़ते रहो,
मंजिलें खुद व खुद तुमको मिल जाएगी।
हमने सोचा नहीं जिनको काटा था कल,
उन दरख़तों पे कलियां भी खिल जाएगी।
तुम न छोड़ो मुझे साथ बैठे रहो,
ये घड़ी कुछ बिछड़ने की टल जाएगी।
अभिषेक सोनी “अभिमुख”
ललितपुर, उत्तर–प्रदेश