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1 Dec 2025 · 1 min read

तुम तसव्वुर करो और बढ़ते रहो,

तुम तसव्वुर करो और बढ़ते रहो,
मंजिलें खुद व खुद तुमको मिल जाएगी।

हमने सोचा नहीं जिनको काटा था कल,
उन दरख़तों पे कलियां भी खिल जाएगी।

तुम न छोड़ो मुझे साथ बैठे रहो,
ये घड़ी कुछ बिछड़ने की टल जाएगी।

अभिषेक सोनी “अभिमुख”
ललितपुर, उत्तर–प्रदेश

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