महफ़िल सजी नजारे देखे
महफ़िल सजी नजारे देखे
घूँघट सभी उतारे देखे।
अँधियारों की चादर ओढ़े
सूरज, चाँद, सितारे देखे।
जिनके बीच मचलतीं लहरें
टूटे वही किनारे देखे।
आयी थी जब गम की आँधी
छुपते कई सहारे देखे।
मना रहे थे जश्न जीत के
अंदर से सब हारे देखे।
हो तुम कौन न जाना अब तक
चेहरे कई तुम्हारे देखे।
अनिल मिश्र प्रहरी।