छत्तीसगढ़ के सम्मान
छत्तीसगढ़ के सम्मान
छतीसगढ के सम्मान ला बचावव रे,
कभू खुद ला कमज़ोर झन मानव रे।
राम बलराम घनश्याम के नाम लेके
रावण कंस मन ला जल्द ही तारव रे।
महानदी शिवनाथ खारून इंद्रावती के,
पानी पिययया इक हुंकार तो मारव रे।
तुहंर अंदर हनुमान बिदयमान हवय,
अपन भीतर के ताकत ला जानव रे।
बस्तर अंबिकापुर मोहला तोला देखत हे,
उंखर मान बर मुट्ठी बांध आगू आवव रे ।
माला,मुंदरी ,खुमरी ,भंदई ला तियागो,
लौठी धर,जुलमी मन ले भिड़ जावव रे।
मांस मदिरा वाले मन कैसे नइ भागही
अपन बासी बोरे के ताकत दिखावव रे।
( डॉ संजय दानी दुर्ग )