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30 Nov 2025 · 2 min read

"जो बोया वही पाया"

“जो बोया वही पाया”
ये कहावत तो सबने सुनी ही होगी; ‘जैसी करनी वैसी भरनी’
‘जो बोओगे वही पाओगे’
यह बात सौ प्रतिशत सही है। यदि हम किसी को देखकर मुस्कुराते हैं तो बदले में मुस्कुराहट ही पाते हैं। और यदि गाली देते हैं तो गालियाँ ही मिलती हैं।
आवत गारी एक है, उलटत होय अनेक।
किसी की सहायता करते हैं तो कृतज्ञता मिलती है।अतः हमें क्या चाहिए ? हमें वैसा ही करना चाहिए।बुराई अपनाकर भलाई की आस नहीं कर सकते इसलिए यह हमारे ऊपर निर्भर करता है कि हम कैसा जीवन जीना चाहते हैं, कैसा आचरण चाहते हैं ; वैसे ही बन जाएँ तो आप स्वयं सुखी बन सकते हैं।
बच्चों क़ो भी अच्छे संस्कार दीजिए। तभी वो आपका सम्मान करेंगे। अगर आप गाली-ग्लौज करते हैं , उनसे चीख चिल्लाकर बात करते हैं तो बच्चे भी वही व्यवहार करते हैं।
झूठ बोलते हैं तो बच्चे से सच की उम्मीद कैसे कर सकते हैं। चोरी करने पर आप उसका बचाव करते हैं तो आप उसे भविष्य में बड़ा चोर बनाने में सहयोग कर रहे हैं।
दोस्तों में लड़ाई झगड़ा होने पर अगर आप हमेशा अपने ही बच्चे का पक्ष लेकर दूसरे बच्चों को धमकाते हैं तो आप उसकी महत्वाकांक्षा को बढ़ाते हैं। वो जो कहता है वही ठीक है बाकी सब गलत । ऐसे में बच्चा अपराध की ओर उन्मुख भी हो सकता है।हम खुद ही समाज का निर्माण करते हैं।समाज भ्रष्ट हैं हिंसक है तो उसमें हम सबका हाथ है । हमने समाज को जो दिया वही हमें वापस मिलता है।आपकी संतान वृद्धावस्था में आपका ध्यान रखे आपकी सेवा करे; अगर आप यह चाहते हैं तो पहले आप अपना उदाहरण प्रस्तुत कीजिए और उनमेंं भी बड़ों की सेवा और आदर की भावना विकसित कीजिए।
सत्य और न्याय के लिए कठोर बनना पड़ता है तो उसमें कोई बुराई नहीं है। स्वयं भी सचेत रहें और आनेवाली पीढ़ी को वो दें जो समाज के लिए उत्तम हो।

-गोदाम्बरी नेगी ‘पुंडरीक’

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