अप्रेल फूल
‘फूल’ न बनायें फूल बाँटे’
फूल बनाने से यहाँ मेरा तात्पर्य है मूर्ख बनाने से है। ये अंग्रेजी भाषा का शब्द fool है ; जिसका अर्थ है मूर्ख । लोगों को मूर्ख बनाने का प्रचल कब और क्यों आरंभ हुआ मैं कह नहीं सकती।
शायद इसका मकसद आपसी मजाक करके हंसी खुशी से नया वर्ष बिताने के लिए किसी ने कुछ शरारत कर ली हो।पर धीरे – थीरे इसका रूप वास्तविक से दूर हो गया , ठीक वैसे ही जैसे होली पर लोग रंग लगाने की जगह गोबर, कीचड़,पेंट आदि से एक दूसरे को मलने लगे। और रंग पर्व के नाम से रंजिशें निकालने लगे।
हलकी फुलकी मजाक तक तो ठीक है पर कभी कभी इसके भयानक परिणाम भी देखने को मिलते हैं। कभी – कभी तो सत्य को झूठ समझ कर हानि उठानी पड़ती है। और कभी सत्य मानकर खीज उत्पन्न होती है।
अभी 1अप्रैल को हमारे पड़ोसी के बेटे तनय को उसके मित्र का फोन आया कि आपके पिता को हार्ट अटैक आया है जल्दी से उन्हें अस्पताल ले जाना होगा । बेटा बॉस से छुट्टी लेकर घर आया। घर आकर देखता है उसके पिताजी बिल्कुल ठीक थे।
सबको यह बात पसंद नहीं आई। सब उस लड़के कोस रहे थे।जब बेटे ने दोस्त को फोन किया तो वह ठहाका मारकर हँस रहा था। अप्रैल फूल बन गए न ।पिछली साल तुमने भी तो बनाया था। तनय मुट्ठी भींचकर रह गया।
ऐसे ही सोनाली ने अपनी सहेली की बात को अप्रैल फूल समझकर अनसुना कर दिया था। जब उसके ससुराल वाले उसे दहेज़ के कारण जलाकर मारना चाहते थे। सहेली ने हिम्मत और सूझ बूझ से खुद को बचा लिया पर उसका आधा शरीर जल चुका था। वो अस्पताल में थी।जब सोनाली को वास्तविकता का पता चला तो उसे बहुत आत्मग्लानि हुई। काश वो सहेली की बात को अप्रैल फूल न समझती तो उसकी सहेली जलने से बच जाती।
इसलिए अप्रैल फूल बनाना छोड़िए और नव वर्ष पर ईश्वर से प्रार्थना कीजिए कि प्रभु की कृपा सदैव हम पर बनी रहे। नव वर्ष में अपने आस पड़ोस में फूल बाँटिए ,द्वार पर बंदनवार सजाइए । मित्रों के साथ खुशियाँ मनाइये। कुछ समाज हित के कार्य कीजिए।मन में नव संकल्प लीजिए।
दूसरों को मूर्ख बनाने वाला सबसे बड़ा मूर्ख है।
-गोदाम्बरी नेगी