Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
30 Nov 2025 · 1 min read

लिखता हूँ गीत मैं जो ऐसे

लिखता हूँ गीत मैं जो ऐसे, कहना नहीं तू अपने लिए।
किससे है मुझको इतनी मोहब्बत, जीता हूँ किसके लिए।।
लिखता हूँ गीत मैं जो ऐसे,——————-।।

यह तो मेरा एक शौक है यारा, इसको कभी छोड़ सकता नहीं।
नहीं दीवाना यहाँ मैं किसी का, बदनाम इससे हो सकता नहीं।।
मेरी आँखों में जो ख्वाब बसा है समझना नहीं उसको अपने लिए।
लिखता हूँ गीत मैं जो ऐसे,——————-।।

मन का हूँ मौजी, मैं करता हूँ मन की, नहीं किसी का मैं हूँ गुलाम।
मुझको करना क्या है मत कहो मुझसे, मुझको मालूम है अपना मुकाम।।
तारीफ यहाँ मुझको करनी है किसकी, इस अपने दिल मैं प्यार लिए।
लिखता हूँ गीत मैं जो ऐसे,———————।।

कभी मैंने इनमें की है बुराई, पसन्द जिसकी अदा मुझे नहीं आई।
जो तस्वीर मुझको अच्छी लगी, गज़ल उसपे यारा मैंने अच्छी बनाई।।
किसकी मिलती है खुशियां यारा मुझे, देता हूँ आवाज़ मैं किसके लिए।
लिखता हूँ गीत मैं जो ऐसे,———————-।।

क्या कभी प्यार तूने मुझको किया है, क्या चाहता है तेरा दिल इतना।
क्या कभी खत तूने मुझको लिखा है, क्या माना है तूने मुझको अपना।।
किसकी इज्जत मैंने की है इनमें, प्यार मेरे दिल में है किसके लिए।
लिखता हूँ गीत मैं जो ऐसे,———————-।।

शिक्षक एवं साहित्यकार
गुरुदीन वर्मा उर्फ़ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला-बारां(राजस्थान)

Loading...