लावणी छंद
लावणी छंद 16,14 अंत गुरु
16 मात्रिक वाले चरण का विधान और मात्रा बाँट ठीक चौपाई छंद वाला है। 14 मात्रिक चरण की बाँट 12+2 है। 12 मात्रिक 3 चौकल, एक अठकल एक चौकल या एक चौकल एक अठकल हो सकता है। चौकल और अठकल के सभी नियम लागू होंगे।
हिन्दू नव वर्ष
आया है नव वर्ष हमारा, धरा सजी है फूलों से।
मधुर सुवास धरा में फैली, भरी लता के झूलों से।
उपवन – उपवन छटा निराली, स्वागत करती कोकिल है।
मीठे स्वर की तान सुनाती, मन तेरा क्यों बोझिल है।
शेर सवार भवानी आयी, राम पधारे रघुकुल में।
जन सब मुदित हुए घर-घर में,कलरव छाया खगकुल में।
उत्सव सा आनंद हृदय में, भक्त सभी उपवास रखें।
माता का होता जगराता , नाना भांति प्रसाद चखें।
धरा चमकती सूर्य रश्मि से, नील गगन गुण गान करे।
ऐसा सुंदर दृश्य सभी के, मन में नव उल्लास भरे।
शीत पवन परदेश गई है , लू का नाम निशान नहीं।
ऐसे में नव वर्ष मनाया, देखा जाता नहीं कहीं।
सर्षप कनक खेत में झूमे, सुमन खिले उद्यानों में।
डाल पेड़ की झुकी फलों से, लहरे ध्वजा मकानों में।
झरने धवल झरें पर्वत से, किरणें अमृत बरसाती।
नयी स्फूर्ति बहार ले आई, आँखों से है छलकाती।।
तन-मन दोनों जब प्रसन्न हों, है नव वर्ष तभी जानो।
जागे नयी चेतना मन में, है नव वर्ष तभी मानो।
ऐसी ऋतु ऐसे मौसम में, नया वर्ष उत्सव आये।
मन में सबकी खुशियाँ भर दे, घर में खुशहाली लाये।।
-गोदाम्बरी नेगी ‘पुण्डरीक’