बजरंग बली
अनवसिता छंद आधारित गीत* वार्णिक
विधान – नगण यगण भगण गुरु गुरु।
यति–6,5=11वर्ण प्रति चरण,दो दो तुकांत।
गणावली- नसल यमाता, भानस गा गा।
मौलिक सृजन
अंजनि के लाल, काज संवारे।
बजरंगबली,राम दुलारे।।
जपे निरंतर, नाम तिहारा
पीर मिटे सब, मिले किनारा।।
नैया हनुमत, तेरे सहारे।
बजरंगबली,राम दुलारे।।
जानकी की सुध, वेगि ले आये।
भ्रात लखन के, प्राण बचाये।।
राघव लखन, भये सुखारे।
बजरंगबली,राम दुलारे।।
पूँछ जलाकर, फूँक दी लंका।
सुर भू लोक में, बाजे है डंका।।
सुरसा को मार, लंकिनी तारे
बजरंगबली,राम दुलारे।।
©® गोदाम्बरी नेगी ‘पुण्डरीक’