माँ गंगा
ताटक छंद
बोलो माँ गंगा की जय!
गौमुख से गंगा जी निकली, बहती है मैदान।
महिमा इसकी सब जग जाने, भारत की पहचान।।
बोलो माँ गंगा की जय!
निर्मल धवल धार है इसकी, लहराती सी चाल।
इसके तट पर नगर बसा जो, होता मालामाल।।
बोलो माँ गंगा की जय!
भक्त भगीरथ तप कर लाये, धन्य हो गये भाग।
सारे पूर्वज तार दिये थे, दूर हुए सब दाग।।
बोलो माँ गंगा की जय!
शिवशंकर ने सिरपर धारा, दिया मान-सम्मान।
स्वर्ग छोड़ धरा पर उतरी, दिया मोक्ष का दान।।
बोलो माँ गंगा की जय!
पापनाशिनी है माँ गंगा, काटे सबके पाप।
नित्य नहाओ जल से इसके, करलो माँ के जाप।।
बोलो माँ गंगा की जय!
कुंभ पर्वपर लगता मेला, सब करते हैं स्नान।
कथा पान करते हैं तट पर, वस्त्र अन्न का दान।।
बोलो माँ गंगा की जय!
विविध औषध घुली हैं इसमें, तन के कटते रोग।
इसके तटपर बैठ बैठकर , ध्यान लगाते लोग।।
बोलो माँ गंगा की जय!
मैला करो न इसके तट को, यह है भारी पाप।
साबुन का उपयोग किया जो, भोगोगे संताप।।
बोलो माँ गंगा की जय!
स्वरचित व मौलिक
-गोदाम्बरी नेगी ‘पुंडीरक’