आंखों की क्या कसूर,
आंखों की क्या कसूर,
जब तुम इतनी खूबसूरत हो
तो तुम्हें देखेगा ही,
दिल की क्या कसूर,
जब तुम्हारी सुर्ख़ियों में इतनी मिठास है
तो धड़केगा ही।
वो अलग बात है तुम न दिखो तो तकलीफ होती है,
जो आँखें तुम्हें देख कर चहकती हैं, उस पल रोती हैं,
जो दिल सुर्ख़ियों से धड़कता है,
उस पल थम सा जाता है।
मैं जिंदा रहता हूँ, मगर दिल मर सा जाता है,
ये भ्रम तो है ही कि तुम मेरी हो जाओगी,
या मैं ठिकाना हो जाऊंगा। कल या परसो
फिर मैं तुमसे जुदा हो जाऊंगा,
और रह जाएगा सिलसिला वही,
जहां से आगाज़ हुआ था,
तुम शौहर के घर चली जाओगी,
हम स्वर्ग के सफ़र पर चला जाऊंगा।
~आलोक के.एस