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30 Nov 2025 · 1 min read

आंखों की क्या कसूर,

आंखों की क्या कसूर,
जब तुम इतनी खूबसूरत हो
‎तो तुम्हें देखेगा ही,

दिल की क्या कसूर,
‎जब तुम्हारी सुर्ख़ियों में इतनी मिठास है
‎तो धड़केगा ही।

‎वो अलग बात है तुम न दिखो तो तकलीफ होती है,
‎जो आँखें तुम्हें देख कर चहकती हैं, उस पल रोती हैं,

‎जो दिल सुर्ख़ियों से धड़कता है,
उस पल थम सा जाता है।
‎मैं जिंदा रहता हूँ, मगर दिल मर सा जाता है,

‎ये भ्रम तो है ही कि तुम मेरी हो जाओगी,
‎या मैं ठिकाना हो जाऊंगा। कल या परसो
फिर मैं तुमसे जुदा हो जाऊंगा,
‎और रह जाएगा सिलसिला वही,
जहां से आगाज़ हुआ था,
‎तुम शौहर के घर चली जाओगी,
‎हम स्वर्ग के सफ़र पर चला जाऊंगा।
~आलोक के.एस

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