प्यासा कवि के कुंडलियां
प्यासा कवि के कुंडलियां
Nov 30, 2025 | कविताएं – शायरी – ग़ज़ल | विजय कुमार पाण्डेय ‘प्यासा’ | 👁 28
हँसते – हँसते ज़िन्दगी, उसने काटी यार।
जिसने मानी सभ्यता, समझा शिष्टाचार।।
समझा शिष्टाचार, मनुजता को अपनाया।
जी भर जीया प्यार,खुशी के गीत लुटाया।।
‘प्यासा’ चलता राह,सनातन के जो रस्ते ।
जीता हो संतुष्ट,जिन्दगी हँसते – हँसते ।।
✍️ प्यासा