देव दयानिधि दीन पर, कृपा-दृष्टि दो डाल।
देव दयानिधि दीन पर, कृपा-दृष्टि दो डाल।
दिनकर सम आलोक दूँ, मैं भी तेरा लाल।।
माया मोहित मन सदा, मुदित मोह के पाश।
कृष्ण कृपा अब कीजिए, कलुष क्रोध कर नाश।।
मोहन मेरा मन हरे, मधुरिम मुरली तान।
सरस सहज संबल सखे, सुनकर दोनों कान।।
सुंदर सद्गुण सीख से, सुरभित गीता गान।
सत्य संवरण शील का, भरे सदा ही ज्ञान।।
“पाठक” गीता को पढ़े, प्रभु को करे पुकार।
कृष्ण-कन्हैया की कृपा, करता कष्ट किनार।।
:- राम किशोर पाठक (शिक्षक/कवि)