ईमानदारी का पुरस्कार
ईमानदारी का पुरस्कार
अन्याय के कटघरे में
वह निर्दोष रोज खड़ा होता है
अब तो उसने इकबाल ए जुर्म कर लिया।
जो उसने किया नहीं,
हवालात में, पुलिसिया डंडा
रोज उसके शरीर की चौहद्दी नापती।
वजह साफ था,
वह ईमानदारी की रोटी खाता था
और उसके शुभचिंतकों के लिए
वह काल का ग्रास था
अगर वह अपना मुख बंद रखता
या शामिल होता उसे रात की
सामूहिक पार्टी में।
तो वह भी होता आज
बाबू, मालिक, और वगैरह वगैरह।
मगर उसने जुर्म किया,
अपने सिद्धांत पर अटल रहकर
और पुरस्कार स्वरूप रखी गई
उसके माथे पर
बेईमानी का ताज
और हाथों पर
फूलों के गुलदस्ते
की जगह
काले कारनामों
का गुलाब दे दिया गया।
माई लॉर्ड के सम्मुख
वह कोई सबूत नहीं जुटा पाया
अपनी बेगुनाही का
उसे अपनी ईमानदारी के बदले
दस साल सश्रम कारावास मिली।
© अमन कुमार होली