खूबसूरत
मुक्तक
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बहुत ही खूबसूरत सा समय है।
अभी शायद मिली कोई विजय है।
भरी चाहत लिए हो गुनगुनाते।
मधुर मन को लुभाती आज लय है।
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धुंध ओढ़ कर आ गई, देखो शीतल भोर।
श्वेत सिंधु में खो गये, ज्यों प्रकृति के छोर।
धीरे-धीरे देखिए, लगी पिघलने ओस।
और घोंसले छोड़ कर, पंछी करते शोर।
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–सुरेन्द्रपाल वैद्य