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29 Nov 2025 · 1 min read

मुक्तक

बेक़रारी की दिल पर कटार गुज़री है।
कौन सी बात तुम्हें नागवार गुज़री है।
आज आए नहीं ख़्वाब में भी क्यों तुम ,
सोचते- सोचते चाँद रात गुज़री है।।

डॉक्टर रागिनी स्वर्णकार

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