डगमगाया हूं पर हारा नहीं
डगमगाया हूं मगर हारा नहीं
या यूं कहें हारना ग्वारा नहीं।
मुश्किल हालातों से डरूंगा मैं
अरे नहीं इतना मैं बेचारा नहीं।
कोशिश लाख करो गिराने की
उठूंगा,राह में अंधियारा नहीं ।
जिंदगी की चोटों से डर जाऊं
क्या चोटों ने मुझे संवारा नहीं।
मुझे ढूंढना है मेरा आसमान
गैरों का मुझे चाहिए सहारा नहीं।
सुरिंदर कौर