अपने देते जो भरें, बड़ी देर से घाव ।
अपने देते जो भरें, बड़ी देर से घाव ।
ऐसे जख्मों के कहाँ , बुझते कभी अलाव ।।
सुशील सरना / 29-11-25
अपने देते जो भरें, बड़ी देर से घाव ।
ऐसे जख्मों के कहाँ , बुझते कभी अलाव ।।
सुशील सरना / 29-11-25