तेरी यादों की अना, तेरी खमोशी का वजूद,
तेरी यादों की अना, तेरी खमोशी का वजूद,
आज भी दिल में कहीं नाम तेरा ही उभरता।
महेंद्र ‘मजबूर’
तेरी यादों की अना, तेरी खमोशी का वजूद,
आज भी दिल में कहीं नाम तेरा ही उभरता।
महेंद्र ‘मजबूर’