विषय: दुनियादारी सीख लो
विषय: दुनियादारी सीख लो
(विधा: छंद सरसी)
सीख रखो सब दुनियादारी,आ सकता है काम।
भोले-भाले बने रहे तो,ठीक नहीं अंजाम।।
रहो बचाते बचो स्वयं भी, चलता चल अविराम।
स्वार्थ अंध मत बनना प्यारे, होना मत बदनाम।।
बड़े बड़े हैं यहाँ खिलाड़ी,मिलते सुबहो-शाम।
कहते सूली चढ़ जा बेटे,भला करेंगे राम।।
मिहनत के बलबूते जो भी, प्राप्त तुम्हें हो दाम।
संतोष उसी से कर लेना,लेकर हरि का नाम।।