धर्म ध्वजा आरोह
///धर्म ध्वजा आरोह///
धर्म ध्वजा के आरोहण से ,
हर्षित भास्कर और गगन है ।
मंगल ध्वनि भरी दसो दिशा ,
बलैयां पा पाकर राष्ट्र मगन है।।
राम कृपा के अवतरण से,
यह सब हो रहा है संभव ।
दिव्य शक्तियां उतर रही हैं,
देख रहा संस्कृति उद्भव।।
सूर्यवंश की ध्वजा पताका,
फिर से भारत में लहराई है ।
जन-जन उत्स जगा देखो,
सृष्टि में आशा घिर आई है।।
भास्कर की कृपा रश्मियां,
बरस रही भारत भाल पर ।
उत्थान धर्म सुनिश्चित अब,
अमिट रेख बनी काल पर ।।
असुरताई का उच्चाटन होगा ,
सारी जगती हर्षित हो जाएगी ।
भगवंत दिवाकर के विग्रह से,
जनता धर्म नीति सुख पाएगी ।।
उत्फुल्ल सरयू और अयोध्या,
नगरी करती जय-जय कार।
परम वैभव संपन्न धरा पर ,
देवता आ करने लगे विहार।।
भाग्यवान है प्रजा राष्ट्र की ,
जिनने यह सुकाल देखा है ।
भई प्रगट पुण्यगंग धरा पर,
इठलाता जनमानस देखा है ।।
सुधर्म धुरीण प्रजाजन होंगे ,
दानवता का उच्चाटन होगा ।
स्वर्ण सिंहासनी भारत माता,
अतुल संपदा उत्पादन होगा।।
अब सतयुग अवतरण धरा पर,
गल्प नहीं साक्षात् दिखाई देगा।
अमित कृपा से परम शक्ति की,
परम वैभव से राष्ट्रकोष भरेगा।।
स्वरचित मौलिक रचना
डॉ. रवींद्र सोनवाने ‘रजकण’
बालाघाट (मध्य प्रदेश)