कृष्ण कृपा करिए जरा, क्रंदन करता भक्त।
कृष्ण कृपा करिए जरा, क्रंदन करता भक्त।
मोहन मेरा मन सदा, माया में आसक्त।।
सुखद सलोना सर्वदा, सुंदर श्यामल रूप।
नित्य निहारे नेह से, नटवर नैन अनूप।।
चित चकोर चंचल सदा, चितवत नंदकिशोर।
भव-भंजन भगवान को, भजता भाव विभोर।।
देव दयानिधि दिव्य तुम, दर्शन दे दो आज।
दीन द्रवित देवेश से, सुफल करो हर काज।।
प्रेम पुजारी प्रभु जरा, “पाठक” पर दे ध्यान।
प्रबल परीक्षा की घड़ी, आ जाना भगवान।।
:- राम किशोर पाठक (शिक्षक/कवि)