सीधी सट्ट -८४७
सीधी सट्ट -८४७
रे अज्ञानी, दुनिया में सब समय के अनुसार होता है, हमारे तुम्हारे अनुसार नहीं। लेकिन समय, स्थान और परिस्थिति कुछ भी हो, प्रत्येक क्रिया-प्रतिक्रिया में मनुष्य की दखल होती है। कोई व्यक्ति जिसे एक लंबी यात्रा कर दूसरे महानगर पहुँचना है, यदि वह वाहन छोटा/बड़ा, उनकी समयसारिणी, भीड़, असुविधा आदि पर ही केंद्रित रहे तो महीने, साल तो क्या, दशकों में भी गंतव्य पर नहीं पहुंँच सकता। गति ही जड़ता से उबरने का एकमात्र उपाय है। व्यक्ति को अपनी स्थितिज ऊर्जा को गतिज ऊर्जा में बदलने वाला कोई अवसर नहीं त्यागना चाहिए।