"तन्हा सही, पर तेरी यादों की महफ़िल में जी रहा हूँ,
“तन्हा सही, पर तेरी यादों की महफ़िल में जी रहा हूँ,
हर खामोशी में तेरे होने का अहसास महसूस कर रहा हूँ।”
महेंद्र ‘मजबूर’
“तन्हा सही, पर तेरी यादों की महफ़िल में जी रहा हूँ,
हर खामोशी में तेरे होने का अहसास महसूस कर रहा हूँ।”
महेंद्र ‘मजबूर’