*वायु प्रदूषण के फायदे (हास्य व्यंग्य)*
वायु प्रदूषण के फायदे (हास्य व्यंग्य)
आजकल कोई हमें सुबह जल्दी उठने के लिए नहीं कहता। सबको मालूम है कि वायु प्रदूषित है। सुबह-सुबह कोहरे के साथ मिलकर यह सांस लेते समय नुकसान पहुंचा जाती है। सुबह उठकर आदमी क्या करेगा? थोड़ा घर पर टहलेगा फिर सड़क पर जाएगा। उसके बाद किसी पार्क में पहुंचकर घंटा-आधा घंटा टहल कर वापस आ जाएगा। अगर वायु अच्छी है तो सांसों के साथ भीतर जाकर स्वास्थ्य लाभ करेगी। वायु खराब है अर्थात प्रदूषण है तो सांसों के साथ शरीर के भीतर नुकसान पहुंचाएगी। इसलिए वायु प्रदूषण के समय घर से बाहर जाना अच्छी बात नहीं होती। बिस्तर पर लेटे-लेटे अथवा पालथी मारकर बैठे-बैठे रहने में ही स्वास्थ्य-लाभ कहलाता है। जाड़ों में बिस्तर छोड़कर भला कौन उठना चाहता है! भला हो इस वायु प्रदूषण का कि इसकी वजह से हमें लंबी चादर तानकर सुबह को देर तक सोने का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है।
वायु प्रदूषण के कारण आजकल सांस लेने में भी कुछ कठिनाई होती है। आंखों में भी जलन होती है। इसके कारण शारीरिक परिश्रम करने से व्यक्ति बचा रहता है। जब आंखें भारी हो जाती हैं तो आंखें बंद करके बैठना ही उचित होता है। सारे कार्यों से मुक्त होकर आराम करने का रास्ता वायु प्रदूषण के कारण इन दिनों व्यक्ति को सहज उपलब्ध है। जरा सोचिए ! न वायु प्रदूषण होता, न सांस फूलती, न आंखों में भारीपन होता, न काम से जी चुराने का अवसर मिलता! ऐसी भी क्या जिंदगी कि सुबह दिन निकलते ही उठ जाओ। टहलने के लिए पार्क में जाओ। दोनों आंखें खोलकर काम करते रहो। ऐसा जीवन ही व्यर्थ है कि सुबह उठते ही मेहनत-मजदूरी मे जुट जाओ और सांस बिल्कुल भी न फूले। फिर आराम व्यक्ति कैसे करेगा ?
वायु प्रदूषण के कारण गला खराब होता है। जुकाम हो जाता है। बोलने में कठिनाई होती है। इससे मौन व्रत धारण करने में व्यक्ति को अनुकूल परिस्थितियां मिल जाती हैं। वरना भला कौन मौन व्रत धारण कर सकता है! गला खराब होने के कारण व्यक्ति जो बोलता है, वह भी किसी की समझ में नहीं आता। तब बातचीत करने वाला स्वयं ही कह देता है कि भाई साहब आप आराम करिए। बोलने का कष्ट न करें। मौन साधना बहुत दिव्य मानी जाती है। ऐसी दिव्यता का सानिध्य केवल वायु प्रदूषण के कारण ही संभव है।
निकम्मे और आलसी व्यक्ति के लिए वायु प्रदूषण वरदान है। आराम से लेटे रहो और आंखें बिल्कुल मत खोलो।
देखिए! यह आरामतलबी और निकम्मेपन का सुख कितने दिन मिलेगा! जैसे ही वायु प्रदूषण समाप्त होगा, फिर से वही पुरानी नीरस दिनचर्या चालू हो जाएगी।
——————————————–
लेखक :रवि प्रकाश
बाजार सर्राफा (निकट मिस्टन गंज), रामपुर उत्तर प्रदेश
मोबाइल 9997615451