टूटा हूं मैं, मगर टूटा नहीं
टूटा हूं मैं, मगर टूटा नहीं
टूटा हूँ मैं, मगर टूटा नहीं,
हिम्मत का दीप जला है कहीं।
अँधियारे ने चाहे रोके राह,
चलने की जिद में हूँ मैं यहीं।
टूटन को मैं हराऊँगा,
फिर से खुद को बनाऊँगा।
गिरकर भी मुस्काऊँगा,
ये दिल ना हार माने रे।
ओ-ओ… दिल ना हार माने रे।
तूफ़ानों की बातें सुनकर,
मन थोड़ा सा काँपा जरूर।
पर उम्मीद की डोरी पकड़,
मैंने फिर खुद को किया मजबूर।
टूटन को मैं हराऊँगा,
फिर से खुद को बनाऊँगा।
गिरकर भी मुस्काऊँगा,
ये दिल ना हार माने रे।
ओ-ओ… दिल ना हार माने रे।
राख से भी उग आता हूँ,
हौसला मेरा रहता जवान।
कदमों में है नई रवानी,
जीत मेरा कल, मेरा अरमान।
टूटन को मैं हराऊँगा,
फिर से दुनिया सजाऊँगा।
जो छूट गया था रास्तों में,
वह सब वापस पाऊँगा।
ओ-ओ… दिल ना हार माने रे…
मुकेश शर्मा विदिशा