कितने प्यारे होते फ़ूल ।
कितने प्यारे होते फ़ूल ।
सबसे न्यारे होते फ़ूल ।
लाल , गुलाबी , नीले पीले ।
कुछ होते बड़े चमकीले ।
महका देते सारी क्यारी ।
सचमुच इनकी शान निराली ।
चले हवा तो ये लहराते ।
कांटों में भी ये मुस्काते ।
मुश्किल में ना घबराएं हम ।
फ़ूल यही बस पाठ पढ़ाते ।
शोभा देता नहीं हमें भी ।
विचलित होना पीड़ाओं से ।
देखो इनकी छटा निराली ।
जो कांटों में खिले प्यार से ।
बाल कविता
बाल दिवस की शुभकामनाएं !
🙏🙏
प्रगति दत्त