एक तू ही तो नहीं है
एक तू ही तो नहीं है, इस जमाने में हसीन।
तुमसे भी ज्यादा है यहाँ हसीन लाखों चेहरें।।
क्यों सिर्फ तुम्हारे लिए करें जीवन को बर्बाद।
तुम्हारे सिवा और भी है रोशन यहाँ सितारें।।
एक तू ही तो नहीं है———————-।।
खुशनसीब तू खुद को समझ, कि तुमसे प्यार है मेरे दिल को।
दिखावा नहीं यह सच्चा प्यार है, कि तू पसंद है मेरे दिल को।।
अच्छा नहीं है हमसे, रोज ऐसे झगड़ना।
तुम्हारे सिवा और भी है, फूल यहाँ प्यारे।।
एक तू ही तो नहीं है——————–।।
गलतफहमी है तेरी, कि मैं हूँ मग़रूर।
तुम्हारे बिना जी नहीं सकता, कि तू है तकदीर।।
अपने इस शक को तू मिटा दें अब।
तुम्हारे सिवा और भी है हसीन यहाँ नजारें।।
एक तू ही तो नहीं है——————–।।
उसूल है हमारा भी, उस घर को जाते नहीं है।
जहाँ नहीं इज्जत हमारी, खिदमत उनकी करते नहीं है।।
चाहते हैं हमको भी, यहाँ पर बहुत लोग।
देते हैं जो खुशियाँ बहुत, बनकै दोस्त हमारे।।
शिक्षक एवं साहित्यकार
गुरुदीन वर्मा उर्फ़ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला-बारां(राजस्थान)