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26 Nov 2025 · 1 min read

गजल: 'बेगाना'

गजल: ‘बेगाना’

किस किस पर इल्ज़ाम लगाऊँ,
किस किस में फ़साना निकला।

आँसू को जो दूर भगाता,
वो ख़ुशियों का खज़ाना निकला।

बाहर बिल्कुल सूना-सूना,
अंदर रौशन-मैख़ाना निकला।

रास्ते में जो थम कर बोला,
वो सबसे अनजाना निकला।

जिसको अपना समझा था मैं,
वो सबसे बेगाना निकला।

सुनील बनारसी

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