गजल: 'बेगाना'
गजल: ‘बेगाना’
किस किस पर इल्ज़ाम लगाऊँ,
किस किस में फ़साना निकला।
आँसू को जो दूर भगाता,
वो ख़ुशियों का खज़ाना निकला।
बाहर बिल्कुल सूना-सूना,
अंदर रौशन-मैख़ाना निकला।
रास्ते में जो थम कर बोला,
वो सबसे अनजाना निकला।
जिसको अपना समझा था मैं,
वो सबसे बेगाना निकला।
सुनील बनारसी