प्यासा की एक कुंडलियां :-अन्दर की सुन्दरता
प्यासा की एक कुंडलियां :-अन्दर की सुन्दरता
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सुन्दर अन्दर हो अगर,जग- यह सुन्दर जान।
खारे सागर को कहां,मीठे जल का ज्ञान।।
मीठे जल का ज्ञान,भान अन्दर से होता।
उसको कहां उजास,है जिसका अंत:सोता।।
प्यासा करो सुधार,उसे जो बैठा अन्दर।
सब कुछ होगा ठीक,रखा जो अन्दर सुन्दर।।
-‘प्यासा’