ध्वजारोहण
पच्चीस नवम्बर पच्चीस है
श्रद्धा है भरी नरेन्दर में।
अवधेश के पुर लहराए,
इक वृहद पताका मंदिर में।
सौगंध सनातन पूर्ण हुई,
स्थान वही संदर्भित है।
अध्याय नया आरंभ हुआ
राघव का मंदिर निर्मित है।
हो गया पताका आरोहण,
मिट गया चिन्ह दुर्दांतो का।
हरि भक्तों का मन हर्षित है,
आह्लादित हृदय संतों का।
भगवा का गौरव ऊंचा है,
वन पर्वत धरा समंदर तक।
मां का कलंक धूल गया सृजन,
झंडा लहराए अम्बर तक।