प्रातः सुमिरन कर रहे, गौरी-पुत्र गणेश।
प्रातः सुमिरन कर रहे, गौरी-पुत्र गणेश।
दया दृष्टि दो दीन पर, रहे न कोई क्लेश।।
विघ्न हरण मंगल करण, पूजित प्रथम सुरेश।
सफल सभी अब कार्य हो, दो ऐसा आदेश।।
तेरा रूप अनूप है, दिव्य सभी संदेश।
कृपा करो हे नाथ अब, देकर कुछ निर्देश।।
शैलसुता के पुत्र हो, जिसके पिता महेश।
नजर तुम्हारी दीन का, बदल सके परिवेश।।
“पाठक” वंदन कर कहे, स्वामी तुम्ही मुकेश।
कर दो पातक पर कृपा, मंगल मूर्ति सुवेश।।
:- राम किशोर पाठक (शिक्षक/कवि)