बहार आ रही
चतुष्पदी
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बहार आ रही खिले अनेक फूल देखिए।
बढ़े चलें उमंग में कहीं न शूल देखिए।
सभी सुरम्य राम नाम प्यार से पुकारिये।
स्वरूप दिव्यता लिए हुए स्वयं निहारिए।
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-सुरेन्द्रपाल वैद्य
चतुष्पदी
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बहार आ रही खिले अनेक फूल देखिए।
बढ़े चलें उमंग में कहीं न शूल देखिए।
सभी सुरम्य राम नाम प्यार से पुकारिये।
स्वरूप दिव्यता लिए हुए स्वयं निहारिए।
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-सुरेन्द्रपाल वैद्य