तुम्हे जाने देना...
तुम्हें जाने देना
मुश्किल था मेरे लिए
शायद तुम भी
जाना नहीं चाहती थी
पर कहीं न कहीं हम दोनों को ही लगता था
हमारी नियति में ठहराव नहीं था
एहसासों के मोती जिसे समय ने पिरो कर
एक माला सा बना दिया था
उसे समय खुद ही तोड़ने वाला था
तुम समझ गई थी शायद
ऐसे रुकना मुमकिन नहीं अब
मैं भी बेबस सा
तुम्हे जाते हुए देखने के सिवा
कुछ कर नहीं सकता था
मुझे तुम्हारे साथ रहना अच्छा लगता था
पर तुम्हें कुछ और पल रुकने को कभी
कह नहीं सकता था
तुमसे हिम्मत तो थी मुझमें
पर तुम्हें जाते ही देखने रहना
कायरता थी मेरी
प्रेम नहीं था शायद
क्योंकि प्रेम इतना कमज़ोर नहीं होता कभी..
अभिषेक राजहंस