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25 Nov 2025 · 1 min read

क्यूँ भला दीवानगी , हद पार बढ़ती जा रही है

ग़ज़ल
1,,
क्यूँ भला दीवानगी , हद पार बढ़ती जा रही है ,
अब तड़प भी ज़ीस्त की शाखों पे चढ़ती जा रही है ।
2,,,
चाशनी डूबा ,अदब, तहज़ीब देखा है ये जब से ,
दिल सुकूने, लब पे चाहत ही घुमड़ती जा रही है।
3,,
खूबसूरत हो, किसी ने पास आकर कह दिया था ,
बस उसी धुन में ये उल्फ़त भी उमढ़ती जा रही है।
4,,
मुन्तज़र थी मुख्तसर सी ,वो तेरी जब सादगी भी ,
देख दिलबर तुझ पे हर तारीफ़ मढ़ती जा रही है।
5,,
बा- वफ़ाई मुस्कुराती देख ली जब “नील” तुझमें ,
बिजलियों की दास्ताँ दीवान गढ़ती जा रही है ।

नीलोफर ख़ान नील रूहानी.

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