खूब दौलत हो जिंदगी में
खूब दौलत हो जिंदगी में हमारे।
यही ख्वाब है जिंदगी में हमारे।।
खूब दौलत हो जिंदगी में——————–।।
कौन आबाद होना नहीं चाहता।
कौन धनवान होना नहीं चाहता।।
हम भी धनवान और आबाद हो।
ऐसे ही इरादें हैं कुछ हमारे।।
खूब दौलत हो जिंदगी में—————।।
चाहता है हर कोई बनाना महल।
हर किसी की है, बस यही फ़ज़ल।।
ऐशो-आराम हो, पास दौलत हो।
इसी मंजिल पे हैं कदम हमारे।।
खूब दौलत हो जिंदगी में—————-।।
यहाँ दौलत का कौन गुलाम नहीं।
किसको दौलत की खुशियाँ मालूम नहीं।।
होती हैं बहारें और बुलन्द सितारें।
हम भी हो रोशन बनकर सितारें।।
खूब दौलत हो जिंदगी में————-।।
कोई देता नहीं साथ मुफ़लिस का।
प्यार और रिश्ता है सिर्फ पैसों का।।
यारी दौलत से है, रिश्ता दौलत से।
इसलिए कम है यहाँ साथी हमारे।।
खूब दौलत हो जिंदगी में—————।।
हमसे दौलत उस यार को चाहिए।
हमको भी उसकी मोहब्बत चाहिए।।
वह है हमारा दिल, वह है हमारा प्यार।
क्योंकि वो तो है ख्वाब हमारे।।
खूब दौलत हो जिंदगी में—————।।
शिक्षक एवं साहित्यकार
गुरुदीन वर्मा उर्फ़ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला-बारां(राजस्थान)