रिसते वे रिश्ते सभी, जिनमें अपना रक्त।
रिसते वे रिश्ते सभी, जिनमें अपना रक्त।
किस्से ये किससे कहें, किस पर इतना वक्त ।।
पराकाष्ठा स्वार्थ की, देती मन झकझोर।
तार-तार रिश्ते हुए, आया कलयुग घोर।।
© सीमा
रिसते वे रिश्ते सभी, जिनमें अपना रक्त।
किस्से ये किससे कहें, किस पर इतना वक्त ।।
पराकाष्ठा स्वार्थ की, देती मन झकझोर।
तार-तार रिश्ते हुए, आया कलयुग घोर।।
© सीमा