हिंदी दोहे बिषय-- वैभव
हिंदी दोहे बिषय- वैभव
वैभव जाने क्या यहाँ,भारत का मजदूर।
लगा रहे जो काम में,थककर होता चूर।।
वैभव का रस पान भी,जाने यही किसान।
फसल पके जब खेत में,घर में आए धान।।
वैभव को जो मानते,धन से जुड़ा लगाव।
‘राना’ वह जाने नहीं,क्या संतोषी भाव।।
जहाँ नहीं संतोष है,धन वैभव बेकार।
वह घोड़ा किस काम का,जिस पर नहीं सवार।।
वैभव भी कब रोकते,कष्टों के अंदाज।
विपदाएँ भी तब लिपट,बहुत करें आबाज।।
*** दिनांक -25-11-2025
✍️ राजीव नामदेव”राना लिधौरी”
संपादक “आकांक्षा” पत्रिका
संपादक-‘अनुश्रुति’त्रैमासिक बुंदेली ई पत्रिका
जिलाध्यक्ष म.प्र. लेखक संघ टीकमगढ़
अध्यक्ष वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़
नई चर्च के पीछे, शिवनगर कालोनी,
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