कुण्डलिया छंद
!! श्रीं !!
सुप्रभात!
जय श्री राधेकृष्ण !
शुभ हो आज का दिन !
🙏
लीलाधर लीला रचे, अनगिन योनि बनाय।
कर्म भोगने जीव फिर, योनि भोगने आय।
योनि भोगने आय, यही माया कहलाती।
सृष्टि चक्र में डाल,जीव को खेल दिखाती।।
कहे ‘ज्योति’ समझाय, देख कर कर्म किया कर।
देख रहा सब मौन, कहें जिसको लीलाधर ।।
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महेश जैन ‘ज्योति’,
मथुरा।
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