कविता
कविता
नेकी रही निसानी
आगी,पानी, हवा अउर धरती आकाश मिलाके
किसिम-किसिम के मूरति,मूरतिकार रचे सरियाके
सबकुछ जानलजाता बाकिर ई अनजान बुझाला
ओ मूरति के भीतर जाने कइसन प्रान डलाला
परत प्रान ओ मूरति में ऊ मूरति लागे डोले
चले पाँव से,सुने कान से, मुह से लागे बोले
प्रान सहित जब ऊ मूरति उतरे धरती पर भाई
घर में बा सन्तान भइल,बाजेला खूब बधाई
पाँच तत्व के ओ मूरति में जबले प्रान रहेला
तबले करत रहे ऊ मूरति तरह-तरह के खेला
बाकिर जहिया प्रान पखेरू मूरति से उडि़ जाला
सगरी खेल भुलाला,मूरति धरती पर भहराला
गगन!गगन में मिल जाला आगी में आग समाला
माटी रहे जवन,माटी में,ऊ जाके मिलि जाला
हवा ! हवा में मिले,मिले जाके पानी में पानी
जे-जे आइल बा धरती पर,सबकर इहे कहानी
अवधू एगो गोट बात ,आखिर में राखत बानी
नेक काम करिहs,मुअलो पर नेकी रही निसानी
अवध किशोर ‘अवधू’
मोबाइल नम्बर 9918854285