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25 Nov 2025 · 1 min read

वासंती सी

चतुष्पदी
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खो जाने की वासंती सी, आई है वेला प्यारी।
फैला देता है चंदा भी, रातों में आभा न्यारी।
हो जाती पूरी आशाएं, देखो जो भी ठानी हैं।
बाकी सारे रिश्ते-नाते, झूठे हैं बेमानी हैं।
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-सुरेन्द्रपाल वैद्य

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