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24 Nov 2025 · 1 min read

कुण्डलिया छंद !

!! श्रीं !!
सुप्रभात !
जय श्री राधेकृष्ण !
शुभ हो आज का दिन !
🙏
लख चौरासी योनियाँ, कहे सनातन धर्म।
जीव सदा भोगें इन्हें, जैसे जिनके कर्म ।।
जैसे जिनके कर्म , कभी जलचर बन जाते।
थलचर नभचर कभी, खोल में जीव समाते।।
शुभ कर्मों का योग, बने मानव तन वासी।
कहे सनातन धर्म, योनियाँ लख चौरासी ।।
***
महेश जैन ‘ज्योति’,
मथुरा ।
🪷🪷🪷

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