*राजस्थान दर्शन*
रेत की लहरों पर चलता, मंगलमय हर पाँव,
सीकर में खाटू श्याम बाबा, देते भक्तों को नव छाँव।
नयन झुके तो नेह बरसता, मन हो जाता लीन,
श्याम नाम के मंत्र से सजता, श्रद्धा से मन रंगीन ।।
अजमेर की राहें कहतीं, सूफ़ी का संदेश,
चिश्ती की मजार पे मिलता, सबको प्रेम-विशेष ।
धूप अगर की महक में घुलता, मानवता का गीत,
जहाँ फ़क़ीरों की जुबां सिखाती—सबसे पहले प्रीत ।।
पुष्कर में पावन सरोवर, और ब्रह्मा का धाम,
जगत-पिता के दर्शन से मिलता, जीवन को विश्राम।
घंटों की मधुर अनुगूँज में, मन होता निष्कपट,
आरती की लहरों संग बहता, हर पल पावन-वट ।।
राजस्थानी रंग-बिरंगी चुनरी, पगड़ी की शान,
माटी की सुगंध में बसता, वीरों का अभिमान ।
घूमर की थिरकन गूँजे, ढोलक की मधुर तान,
रंगों-सी परतें खोल दिखाती, संस्कृति की पहचान ।।
ओ थार भूमि! धन्य तुम्हारा, रूप अनूप अपार,
भक्ति, प्रेम और लोक-राग से, तू करती संसार सँवार ।
सीकर, अजमेर, पुष्कर मिलकर—तीर्थों का हे मान,
राजस्थान की पावन धरा पर, नित वंदन मेरा प्रणाम ।।