मुक्तक
मुक्तक
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भावनाओं के मुखौटे ओढ़ कर।
क्यों ठिठक जाते कभी मुख मोड़ कर।
हर चुनौती का करें हम सामना।
व्यर्थ दुविधाएं हमेशा छोड़ कर।
~~~~~~~~~~~~~
-सुरेन्द्रपाल वैद्य
मुक्तक
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भावनाओं के मुखौटे ओढ़ कर।
क्यों ठिठक जाते कभी मुख मोड़ कर।
हर चुनौती का करें हम सामना।
व्यर्थ दुविधाएं हमेशा छोड़ कर।
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-सुरेन्द्रपाल वैद्य