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24 Nov 2025 · 1 min read

मुक्तक

मुक्तक
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भावनाओं के मुखौटे ओढ़ कर।
क्यों ठिठक जाते कभी मुख मोड़ कर।
हर चुनौती का करें हम सामना।
व्यर्थ दुविधाएं हमेशा छोड़ कर।
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-सुरेन्द्रपाल वैद्य

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