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23 Nov 2025 · 1 min read

कहानी: “दो कबूतर और टूटी छत”

कहानी: “दो कबूतर और टूटी छत”

पुराने पीपल के ऊपर एक बड़ा-सा घोंसला था, जहाँ दो कबूतर रहते थे—धवल और उसिरा।
दोनों साथ रहते, साथ उड़ते, और बारिश से बचने के लिए उसी घोंसले में टिकते।

एक दिन हवा के झोंके से घोंसले की छत का एक हिस्सा टूट गया।
धवल बोला — “हमें इसे ठीक कर लेना चाहिए।”
उसिरा बोला — “क्यों? मेरी तरफ तो पानी नहीं आता।”

बस, बात इतनी-सी थी, और दोनों के बीच कलह शुरू हो गई।
धवल बोला — “कल हवा बदलेगी तो तुम्हारी तरफ भी आएगा।”
उसिरा बोला — “वो तो जब आए, तब देखेंगे!”

दिन बीते। बारिश का मौसम आया।
पहली ही तेज़ बरसात में पानी टपकने लगा—धवल की तरफ भी, उसिरा की तरफ भी।
छत की वही टूटी जगह अब दोनों के लिए मुसीबत बन चुकी थी।

बरसात इतनी तेज थी कि घोंसला आधा भर गया।
दोनों कबूतर भीगते हुए सोचा—“हम साथ रहते हैं, पर कलह में इतना खो गए कि छत ही भूल गए।”

पास बैठी एक बुद्धिमान श्वेत-चिड़िया ने कहा—

“घोंसला किसी एक का नहीं होता।
जब घर की छत टूटती है, तो बारिश सबको भिगोती है—
चाहे फूट किसी एक तरफ से शुरू हुई हो।”

अगली सुबह दोनों कबूतर साथ निकले, नई टहनियाँ ढूँढीं, और मिलकर छत को पहले से ज्यादा मजबूत बना दिया।

और उसके बाद…
वे जब भी नयी टहनी लगाते, धीरे-से कहते—

“झगड़ा नहीं, जुड़ाव ही घर बनाता है।”

सुनील बनारसी

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