ग़ज़ल
चलो ज़िन्दगी को मुहब्बत बना दें
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खुशियों से आओ हर दिल सजा दें
चलो ज़िन्दगी को मुहब्बत बना दें
धड़कन हवाओं में गूंजे दिलों की
चलो इन पलों में ग़ज़ल गुनगुना दें
तुम्हें ज़िन्दगी में हों खुशियाँ मुबारक
मिले ग़म मुझे पर तुम्हें हम दुआ दें।।
मिट जाए नफरत की बदशक्ल दुनियाँ
चलो प्यार इतना दिलों में जगा दें
दहकते सवालों से हलचल है दिल में
रुको हम जवाबों की पलकें बिछा दें
टूटे न सपना कभी भी किसी का
तो साकार करने नया हौसला दें
बहुत कीमती ‘रागिनी’ का परिश्रम
चलो श्रम के सीकर से युग जगमगा दें