01 तुम. अधर पर...
सुबह -सुबह!
चंचल ,
गुलाबी किरण ,
पलक स्पर्श कर गयी।
ठहर गयी ग़ुलाबों पर
जाकर फिर;
लगी छेड़ने …गुलाबों को।
मुस्कुराकर
महक रहे थे गुलाब
उपवन में ..!
मेरी तंद्रिल आँखों में
उग आया
प्रतिबिम्ब तुम्हारा!
तुम अधर पर
महक रहे थे ….!!