अनजान लोग्स ।
नवंबर का आखिरी सप्ताह थी , ठंडी बढ़ने की शुरुआत हो चुकी थी , दोपहर तो नहीं पर रात और सुबह , शाम अच्छी ठंडी पड़ने लगी थी , ऐसे ही एक शाम एक प्रभावशाली , इंटलेक्चुअल नेता ने आनन फ़ानन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की घोषणा की , नए नए नेता बना व्यक्ति इंप्रेसिव प्रोफाइल वाला था तो काफी पत्रकार जुट गए थे।
थोड़ी देर बाद बढ़े बाल , खिचड़ी दाढ़ी वाले नेता आए और पत्रकारों से मुखातिब हुए। उनके सहयोगी ने कहा कि पहले आप नेता जी को सुन लीजिए उसके पश्चात नेता जी आपके प्रश्नों के उत्तर देंगे।
नेता जी के बलगम भरे नाक और गले से आवाज़ बाहर आई – मेरे पत्रकार मित्रों भारत में लोकतंत्र पर बहुत बड़ा खतरा मंडरा रहा है, जैसा कि आप लोग जानते ही हैं कि मैने इस खतरे को कम करने और सच्चा लोकतन्त्र लाने के लिए बरसों इस राज्य का पांव पांव चल कर कोना कोना छान मारा , चुनाव लड़ा , वह अलग बात है कि चुनावों में मेरे सभी उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई, मैंने कहा था कि एक निश्चित संख्या में सीट नहीं आई तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा , पर जमानत जब्त होने के पश्चात मुझे समझ आया कि खतरा मेरे अनुमान से अधिक है तो मैने अपना थूका हुआ चाट लिया और निर्णय लिया कि यही इस धरती , इस प्रदेश में रहकर संग्रह जारी रखूंगा लेकिन …………..।
उनकी बात पूरी हो उसके पहले ही एक नौजवान अधीर पत्रकार उठ खड़ा हुआ और बोला – ई सब तो हम लोगों को पहिले से पता है, यही राम कहानी सुनाने के लिए इस ठंडी में बुलाए हो , कुछ नया हो तो कहो।
नेता जी थोड़ी देर के लिए चुप हो गए और अपने एक सहयोगी की तरफ इशारा किया। वह तुरंत उठा , उस नौजवान पत्रकार को इशारे से अपने पास बुलाया और सबकी नजर से बचाते हुए एक पैकेट पत्रकार के जैकेट के भीतरी जेब में रखकर फुसफुसाया – इंग्लिश अद्भा और भुना मांस है। गरम हो जाओगे। नेता जी इस तरह अपना शराब बंदी को हटाने का निर्णय पूरा कर रहे हैं।
पत्रकार खुश हो गया , अपनी जगह आकर बैठा , तथा नेता जी को ध्यान से सुनने लगा।
– हां तो मैं कहां था , हूं कि मैं यहीं रहूंगा , संघर्ष करूंगा , इस सरकार ने जितने वादे किए हैं , इनसे पूरे करवाऊंगा , मेरी इस बात से न जाने किसे तकलीफ हो गई , सरकार का नाम नहीं लूंगा क्योंकि कोई सुबूत नहीं है।
नेता जी के चेहरे पर भय के भाव उभरे और शरीर में कम्पन हुई , नेता जी ने खुद को सम्हाला और आगे कहना शुरू किया – आप लोग अनजान भाई लोग्स के बारे में जानते ही होंगे , वही जो पाकिस्तान, कनेडा, बांग्लादेश में भारत के दुश्मनों को ठोकते रहते हैं , वे हमारे देश में तो पता नहीं पर प्रदेश में आ चुके हैं।
इतना कहकर वे चुप हो गए। वे देखना चाहते थे कि पत्रकारों में इस बात की प्रतिक्रिया देखना चाहते थे। पत्रकारों में जोर शोर से खुसफुसाहट होने लगी। खुसफुसाहट कोलाहल में तब्दील होती उसके पहले ही नेता ने आगे कहना आरम्भ किया – आज ब्रम्ह मुहूर्त में , समझिए ब्रम्ह मुहूर्त में दो लोग मेरे बेडरूम में आए , एक मेरी छाती पर चढ़कर बैठ गया मेरे दोनों हाथों को कसकर दबा दिया। दूसरे ने एक कट्टा मेरी कनपटी से सटा दिया , नहीं मैं उनका मुंह नहीं देख पाया पर दोनों केसरिया साफा बांधे थे और उसी से अपना मुंह ढकें हुए थे , ध्यान देना केसरिया , और मुझे धमकाया कि अब बहुत चुनाव चुनाव खेल लिए , अब सरकार बन गई है , उसे अपना काम करने दो , जाओ दिल्ली , लंदन , न्यूयॉर्क में आराम करो , कट्टे को कनपटी पर जोर से दबाते हुए आगे बोला वरना मालूम है कि यहां क्या होता है , तुम्हारा शरीर खाद बनेगा और उससे उगेगी फूल गोभी , समझे फूल गोभी। इतना बड़ा धमकी इतनी बड़ी अपमान , कट्टा इस्तेमाल किया , कम से कम कोई विदेशी पिस्टल यूज किया होता , हमको एक देशी कट्टा के काबिल समझा , और हमें गोभी बनाने का धमकी दिया।
पत्रकार – तो का सोचे हैं , पैसा तो दबा कर कमा लिए हैं , यही रहेंगे या बाहर जाएंगे ?
नेता जी – यहीं रहेंगे , यहीं की माटी में मिलेंगे , फिर चाहे गोभी बनकर उगे या कुकुरमुत्ता।
पत्रकार – पक्का , इस बार तो थूक कर नहीं चाटेंगे ?
नेता जी – अब बार बात ऐसी अनजान लोग्स द्वारा धमकी मिली और लगा कि सच में जान का खतरा है तो विचार करना पड़ेगा।
Kumar Kalhans