मुझे चाहिए जी. आज़ादी
मुझे चाहिए जी आज़ादी, अपने जीवन की आज़ादी।
नहीं करनी अपनी बर्बादी, करके किसी से हाँ शादी।।
शादी इज बर्बादी, इज नॉट आबादी।
माई नेम इज जी.आज़ाद, सो आई वांट आज़ादी।।
मुझे चाहिए जी.आज़ादी—————————।।
हाथों में होगी हथकड़ियां, होगी पावों में बेड़ियां।
मांगेगी रोज बीबी मुझसे, नयी नयी हाँ चूड़ियां।।
कंगाल मैं तो हो जाऊँगा, जब होगी संग शहजादी।
शादी इज बर्बादी, इज नॉट आबादी।
माई नेम इज जी.आज़ाद, सो आई वांट आज़ादी।।
मुझे चाहिए जी.आज़ादी———————-।।
पसीना अपना बहाकर, लाऊंगा जो मैं कमाकर।
वह घर में ऐश करेगी, हाँ मेरी कमाई को उड़ाकर।।
हो जायेगी इसी में हाँ, मेरी खुशियां यारों आधी।
शादी इज बर्बादी, इज नॉट आबादी।
माई नेम इज जी.आज़ाद, सो आई वांट आज़ादी।।
मुझे चाहिए जी.आज़ादी———————–।।
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(शेर):- ये कंगन, ये चूड़ियां, यह नथनी, ये पायल।
बालों में महकेगा गजरा, आँखों में होगा काजल।।
गले में सोने का हार, कमर में करघनी की फरमाइश।
फिर बच्चों की पैदाइश, उनकी भी फरमाइश, रह गई मेरी फरमाइश।।
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जीवनभर रहके कुंवारा, मौज मुझको करना है।
मुझे अपनी कमाई सारी, वतन के नाम करना है।।
बुढ़ापे की नहीं है चिंता, लेकिन नहीं करनी है शादी।।
शादी इज बर्बादी, इज नॉट आबादी।
माई नेम इज जी.आज़ाद, सो आई वांट आज़ादी।।
मुझे चाहिए जी.आज़ादी———————-।।
शिक्षक एवं साहित्यकार
गुरुदीन वर्मा उर्फ़ जी.आज़ाद
तहसील एवं जी.आज़ाद