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23 Nov 2025 · 1 min read

नवयुग ने यो के हुयो,

नवयुग ने यो के हुयो,
छूट गई हर शर्म ।
चिपटा-चिपटी के करे,
खुलेआम सब कर्म ।।
सुशील सरना / 23-11-25

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