आधुनिक परिप्रेक्ष्य मानसिक स्वास्थ्य और चुनौतियाँ:
आधुनिक परिप्रेक्ष्य
मानसिक स्वास्थ्य और चुनौतियाँ:
प्रस्तावना:- मनुष्य का अस्तित्व तीन बिंदु पर स्थित है,
शरीर,
मन,
आत्मा।
शरीर गोचर होता है,
मन एक अति सूक्ष्म ऊर्जा है,
आत्मा वह शक्ति है जो पूरे अस्तित्व का आधार देती है।
तीनों एक दूसरे सहायक एवं पूरक हैं। तीनों का स्वस्थ रहना अति आवश्यक है। आधुनकि सोच थोड़ा और आगे जाती है। स्वास्थ्य को चार वर्गों में बनता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार स्वास्थ्य को ४ प्रकार में बांटा है:-
१ शारीरिक स्वास्थ्य
२ मानसिक स्वास्थ्य
३ आध्यात्मिक स्वास्थ्य
४ सामाजिक स्वास्थ्य
*शरीर:- उत्तम भोजन एवं व्यायाम से,
*मन:- उत्तम विचार, उत्तम मनोरंजन, उत्तम पठन पाठन, उत्तम संगति से,
*आत्मा:- प्राणायाम,धारणा, ध्यान से स्वस्थ्य रह सकते हैं।
*सामाजिक स्वास्थ्य का अर्थ है व्यक्ति का परिवेश भी अच्छा हों चाहिए। पड़ोसी झगड़ा करता है, अंडे छिलके फेंकता है शराब पीकर गाली गलौज करता है तो सामाजिक अस्वस्थता ऊपर के अन्य तीनों बिंदुओं को भी प्रभावित करती है अतः स्वास्थ्य की पूर्णता के लिए सामाजिक स्वास्थ्य बहुत आवश्यक है।
अरस्तू कहता है,
“मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है, स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का विकास हो सकता है। समाज के इत्र”
स्वास्थ्य हमारे समग्र स्वास्थ्य का एक अभिन्न अंग है, जो हमारे विचारों, भावनाओं और व्यवहार को प्रभावित करता है। आधुनिक जीवन की थकाऊ भागती हुई तेज़ गति और तनावपूर्ण जीवन शैली मानसिक स्वास्थ्य को एक महत्वपूर्ण विषय बना दिया है।
मानसिक स्वास्थ्य प्रमुख पहलू एवं चुनौतियां:-
१भावनात्मक संतुलन:
मानसिक स्वास्थ्य हमें अपनी भावनाओं को नियंत्रित करने और संतुलित रखने में मदद करता है। आप जैसा सोचते हैं वैसा बन जाते हैं, ऊर्जा का व्यय उतना ही होना है चाहे भावना या सोच सकारात्मक हो अथवा नकारात्मक।
सकारात्मकता उत्साह,आह्लाद,और प्रगति मार्ग प्रशस्त करती है। नकारमकता से खींच डाह ईर्ष्या खेद अवसाद और पतन का मार्ग खोलता है। अतः भावनाओं का संतुलित होना आवश्यक है।
२सामाजिक संबंध:
सामाजिक मेल जोल एवं संबंध हमें एक दूसरे के साथ स्वस्थ संबंध बनाने में सक्षम बनाता है।जब हमारे आस पास की सामाजिक परिस्थित यदि प्रतिकूल होती हैं,मानसिक स्वास्थ्य के समाने चुनौती आने लगती है। आज कल के संदर्भ सामाजिकता थोड़ा अलग प्रारूप में दृष्टिगोचर होती है।
३आत्म-सम्मान:
मानसिक स्वास्थ्य हमें स्वयं को सकारात्मक दृष्टिकोण रखने और आत्म-सम्मान बनाए रखने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।जहां हमें स्वयं को आत्म सम्मान पाने अपेक्षा होती है वहीं देने की स्वप्रेरणा भी होनी आवश्यक है
तनाव प्रबंधन:
हमें तनाव और दबाव का सामना करने के लिए स्वयं को शरीर मन आत्मा से सबल होना पड़ता है इसके लिए कुछ आवश्यक सकारात्मक प्रबंधन की आवश्यकता होती है स्वतः कुछ भी नहीं होता है।
मानसिक स्वास्थ्य के लिए चुनौतियाँ:-
१महत्वाकांक्षा:-
आज के परिदृश्य में प्रत्येक व्यक्ति में अलग दिखने की,श्रेष्ठ देखने की होड़ सी लग गई है, संतोष की भावना अब पुरानी बात हो गई है विकास के नाम पर मनुष्य ने स्वयं को यंत्रवत बना लिया है। जो मानसिक स्वास्थ्य के लिए चुनौती बन गई है।
२ खान पान,पहनावा एवं प्रदर्शन:-
आज खान पान के प्रकार बदल गए हैं पारंपरिक भोजन करने वाले,पारंपरिक वस्त्र पहनने वाले तथा आधुनकि शैली में जीने वाले समूह में अलगाव दिखने लगा है। जहां देखें वहीं प्रदर्शन देखने को मिलता है, जो एक चुनौती बन कर उभरा है।
३ सामाजिक संचार,सचल दूरभाष:- सामाजिक संचार,सचल दूरभाष जहां जीवन के एक पक्ष को सबल किया है वहीं व्यक्ति को एकल कर दिया है विद्यालय,कार्यालय,पार्क,घर,मेला,हाट, में व्यक्ति समूह में रह कर अकेला रह जाता है। यहां तक मंदिर एवं श्मशान घाट तक इससे अछूते नहीं रहे, अब सुख दुख सबके अपने अपने हैं कोई बांटने वाला नहीं है। परिणाम स्वरूप सामाजिक संचार,सचल दूरभाष अपना वीभत्स रूप दिखाने लगा है। आज अच्छे बुरे होने का पैमाना मात्र विज्ञापन है विज्ञापन यदि कोई व्यक्ति वस्तु स्थान को प्रसिद्ध करता है तो वह वस्तु स्वमेव अच्छी एवं गुणवत्ता वाली घोषित हो जाती है।
४ असंतुलित जीवन:तनाव और चिंता:-
उपरोक्त बिंदु आधुनिक जीवन में तीव्र गति से दबाव बनाकर मानसिक स्वास्थ्य के लिए एक भयावह विपद बन कर खड़े दिख रहें है।आज का मनुष्य अवसाद और नैराश्य में घिर गया है। ये मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं हैं जो हमारे जीवन को प्रभावित करती हैं।
५सामाजिक अलगाव_: यद्यपि जनसंख्या भरपूर है जहां देखो भीड़ है फिर भी आधुनिक जीवन का एकाकीपन और अलगाव मानसिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बन रहा है।
६ मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की कमी:-
मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता की कमी इसके समाधान में एक बड़ी बाधा है।
मानसिक स्वास्थ्य बनाये रखने के सुझाव:-
१ योग और ध्यान: ये प्राचीन प्रथाएं मानसिक स्वास्थ्य को अच्छा रख सकती हैं।
व्यायाम और शारीरिक गतिविधि:- नियमित व्यायाम मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है।
सामाजिक समर्थन:-
मित्र और परिवार रिश्तों के साथ अच्छा संबंध मानसिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।
२ महत्वाकांक्षा पर नियंत्रण:
यद्यपि उचित साधन एवं तरीके से विकास करना अनुचित नहीं है फिर भी ‘जो भी प्राप्त है वही पर्याप्त है’ कि सोच होनी चाहिए अर्थात “संतोषम परम सुखम” की अवधारणा अपनाना होगा।
३ विशेषज्ञ की राय:
मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों से मदद लेना आवश्यक है यदि आवश्यक हो जाए तो।
मानसिक स्वास्थ्य एक महत्वपूर्ण विषय है जिसे हमें गंभीरता से लेना चाहिए। जागरूकता, समर्थन और विशेषज्ञ सहायता के साथ, हम मानसिक स्वास्थ्य को उत्तम बना सकते हैं और एक स्वस्थ जीवन जीने में मदद कर सकते हैं।
पहला कदम हमें स्वयं ही उठाना पड़ेगा।
– पूजा सृजन, लखनऊ